Sunday, January 25, 2009

क्या हैं ये ज़िन्दगी ...

फूलों के खिलने का नाम हैं ज़िन्दगी
सपनो के बिखरने का नाम हैं जिन्दगी
मिलके बिछडने का नाम हैं ज़िन्दगी
फिर भी क्या हैं जिन्दगी ? कैसी हैं ज़िन्दगी ?

कभी हँसाती कभी रुलाती ये ज़िन्दगी
कभी धूप तो कभी छांव हैं ये ज़िन्दगी
कभी चाहत तो कभी बोझ हैं ज़िन्दगी
कभी जीते जी मार देती हैं ज़िन्दगी

ना जाने क्यूँ ऐसे ऐसे मोड़ दिखाती ये ज़िन्दगी
न जाने क्यों किसी से ज़िन्दादिली छीन लेती ज़िन्दगी
शायद ऐसे ही टूटने , ऐसे ही सिमटने का नाम हैं ज़िन्दगी
कभी फूलों कभी काँटों की चुभन का नाम हैं ज़िन्दगी...

2 comments:

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

हिन्दी में लिखने का आपका यह प्रयास अच्छा है.........अगर आप इसे और ज्यादा बेहतर कर सकें तो..............!!

मीत said...

बस इतना ही कहूँगा
"यही तो है ज़िन्दगी "
सुंदर लिखा है....
keep it up
---मीत